पीजी कॉलेज में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, 30 सूत्री मांगों को लेकर तीन दिवसीय आंदोलन शुरू, 2 से 4 नवंबर तक चलेगा प्रदेशव्यापी आंदोलन, पुरानी पेंशन बहाली और 65 वर्ष अधिवर्षता आयु करने की उठाई मांग

सकलडीहा (समाचार टुडे)। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के आह्वान पर सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सकलडीहा पीजी कॉलेज में शिक्षकों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। अपनी 30 सूत्री लंबित मांगों के समर्थन में शिक्षकों ने प्रदेशव्यापी आंदोलन के प्रथम चरण में सहभागिता करते हुए शासन और संबंधित विभागों के प्रति नाराजगी जताई। यह आंदोलन 2, 3 एवं 4 नवंबर तक तीन दिनों तक चलेगा। इसमें महाविद्यालय के अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षकों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन मांगों को लेकर समय-समय पर शासन और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी के विरोध में फुपुक्टा के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया गया है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, अधिवर्षता आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने, चिकित्सकीय अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराने तथा स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है। इसके अलावा प्रोफेसर पदनाम अर्हता प्राप्त करने की तिथि से दिए जाने, एनपीएस से संबंधित समस्याओं का समाधान करने तथा शोध एवं शैक्षणिक संगोष्ठियों के आयोजन के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
शिक्षकों ने अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को समाप्त कर उन्हें अनुदानित व्यवस्था के अंतर्गत शामिल करने तथा इन पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान देने की मांग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि समान शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षकों के बीच वेतन और सेवा सुविधाओं की असमानता समाप्त होनी चाहिए।
इसके साथ ही सेवानिवृत्त शिक्षकों के जीपीएफ भुगतान की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण, महाविद्यालय के प्रोफेसरों को विश्वविद्यालय की विभिन्न प्राधिकारी परिषदों में समुचित प्रतिनिधित्व देने तथा परीक्षा पारिश्रमिक एवं उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संबंधित यात्रा भत्ते का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
शिक्षकों ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उनकी सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक सेवा शर्तें, सामाजिक सुरक्षा और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाना जरूरी है। शिक्षकों की जायज मांगों की अनदेखी से उच्च शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। उन्होंने शासन से सभी लंबित मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इस विरोध प्रदर्शन में शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष प्रो. दयानिधि सिंह यादव, प्रो. इंद्रदेव सिंह, प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. शमीम राईन, डॉ. राजेश यादव, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. अजय यादव, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. यज्ञनाथ, डॉ. सीता मिश्र, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. श्यामलाल यादव, डॉ. वंदना, डॉ. अमन, डॉ. रजनीश गुप्त, डॉ. अनामिका सिंह सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।









